CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की दादी का निधन, दिल्ली में पुलिस हिरासत में हैं।

महाराष्ट्र के रहने वाले Cockroach जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हैं। उनकी दादी सावित्रीबाई शंकरराव दीपके का शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। जिस समय परिवार इस दुखद घटना का सामना कर रहा था, उस समय अभिजीत दीपके दिल्ली में पुलिस हिरासत में थे। वह एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन एयरपोर्ट पर ही उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

Abhijit dipke, अभिजीत दीपके

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह हैं कि क्या अभिजीत दीपके को अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र जाने की अनुमति मिलेगी। दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया कि उन्हें दादी के निधन की जानकारी दे दी गई है और घर लौटने के लिए यात्रा में मदद देने का विकल्प भी बताया गया हैं। हालांकि, इस मामले को लेकर CJP और पुलिस के बीच विवाद भी सामने आया हैं।

लंबे समय से बीमार थीं अभिजीत दीपके की दादी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभिजीत दीपके की दादी सावित्रीबाई शंकरराव दीपके महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव में रहती थीं। उनकी उम्र करीब 85 वर्ष बताई गई हैं। वह काफी समय से बीमार थीं और उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान थीं।

बताया गया कि पिछले लगभग एक महीने से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे उन्होंने अपने गांव में अंतिम सांस ली।

दादी के निधन की खबर ऐसे समय आई, जब अभिजीत दीपके दिल्ली में पुलिस हिरासत में थे। परिवार के लिए यह मुश्किल घड़ी और भी भावुक हो गई, क्योंकि अभिजीत अपनी दादी के अंतिम समय में उनके पास मौजूद नहीं थे।

परिवार के सदस्यों के मुताबिक, अभिजीत पिछले 20 से 25 दिनों में अपनी दादी से मुलाकात नहीं कर पाए थे। उनके माता-पिता अनिता और भगवान दीपके को निधन की जानकारी मिली, जिसके बाद वे अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हिंगोली जाने की तैयारी करने लगे।

दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए गए अभिजीत दीपके

अभिजीत दीपके शनिवार सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। उनका उद्देश्य जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होना था। इस प्रदर्शन का आयोजन CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था।

प्रदर्शन का संबंध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर लगाए गए कथित अनियमितताओं के आरोपों से था। CJP और उसके समर्थक इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे थे।

दिल्ली पहुंचने के बाद अभिजीत दीपके, पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और नेता आशुतोष रांका को पुलिस ने विमान के अंदर ही हिरासत में ले लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिसकर्मी विमान के उतरने के बाद अंदर पहुंचे और तीनों नेताओं को अपने साथ ले गए।

अभिजीत दीपके ने इस कार्रवाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया था। वीडियो में उन्हें पुलिस अधिकारियों से कहते हुए सुना गया कि वह गिरफ्तारी देने के लिए ही आए हैं।

दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया गया था। इसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।

दादी के अंतिम संस्कार में शामिल हो पाएंगे या नहीं?

अभिजीत दीपके की दादी के निधन के बाद यह सवाल अहम हो गया कि उन्हें महाराष्ट्र जाने की अनुमति मिलेगी या नहीं। परिवार के लिए यह केवल एक यात्रा का मामला नहीं, बल्कि अंतिम विदाई से जुड़ा भावनात्मक विषय हैं।

NDTV और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कहा कि अभिजीत को उनकी दादी के निधन की जानकारी संवेदनशील तरीके से दी गई थी। पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र लौटने में सहायता देने का विकल्प दिया गया।

पुलिस के अनुसार, इसके बाद फैसला अभिजीत दीपके को करना था कि वह हिरासत के दौरान विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में वहीं रहना चाहते हैं या अपने परिवार के पास जाना चाहते हैं। हालांकि, पुलिस के इस बयान और परिवार तथा पार्टी की ओर से सामने आई प्रतिक्रियाओं के बीच मतभेद दिखाई दिए।

CJP की ओर से आरोप लगाया गया कि अभिजीत के परिवार और पार्टी के वकीलों को उनकी स्थिति और ठिकाने के बारे में उचित जानकारी नहीं दी गई थी। पार्टी ने उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की।

इसलिए, पुलिस के बयान और पार्टी के आरोपों को अलग-अलग पक्षों के रूप में समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि अभिजीत को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिल चुकी थी या वह निश्चित रूप से महाराष्ट्र पहुंच गए थे।

CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

अभिजीत दीपके की हिरासत और उनकी दादी के निधन के बाद CJP ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। पार्टी ने सोशल मीडिया पर कहा कि परिवार और पार्टी के वकीलों को अभिजीत के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए थी। पार्टी ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग भी की।

CJP का कहना था कि इस कठिन समय में परिवार को अपने सदस्य से संपर्क करने का अवसर मिलना चाहिए। पार्टी ने पुलिस पर निजी पारिवारिक दुख के मामले में अनुचित रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

दूसरी ओर, पुलिस की ओर से कहा गया कि अभिजीत को दादी के निधन की जानकारी दी गई और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र लौटने में मदद का विकल्प भी बताया गया।

फिलहाल, इस मामले में दोनों पक्षों के बयानों को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी भी आरोप को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले संबंधित तथ्यों और आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना आवश्यक हैं।

क्यों किया जा रहा था जंतर-मंतर पर प्रदर्शन?

CJP का प्रस्तावित प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर था। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध जताने की योजना बनाई थी।

पार्टी का उद्देश्य इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच पर उठाना और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखना था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात प्रबंधन से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया।

प्रदर्शन से पहले राजधानी में सुरक्षा बढ़ाई गई थी। इसी दौरान अभिजीत दीपके और उनके साथियों को हिरासत में लिया गया।

यह घटना एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, प्रशासनिक अनुमति और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर चर्चा का विषय बन गई हैं।

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